अमर भूमि से प्रकट हुआ हूं, मर-मर अमर कहाऊंगा।
जब तक तुझको मिटा न लूंगा, चैन न कहीं मैं पाऊंगा।।
तुम हो जालिम दगाबाज, मक्कार, सितमगर, अय्यारे।
डाकू, चोर, गिरहकट, रहजन, जाहिल, कौमी गद्दारे।।
खूंगर तोते चश्म, हरामी, नाबकार और बदकारे।
दोजख के कुत्ते खुदगर्जी, नीच जालिमों हत्यारे।।
अब तेरी फरेबबाजी से रंच न दहशत खाऊंगा।
जब तक तुझको मिटा न लूँगा, चैन न कहीं मैं पाऊँगा।।
तुम्हीं हिंद में बन सौदागर आए थे टुकड़े खाने।
मेरी दौलत देख देख के, लगे दिलों में ललचाने।।
लगा फूट का पेड़ हिंद में अग्नी ईर्ष्या बरसाने।
राजाओं के मंत्री फोड़े, लगे फौज को भड़काने।।
तेरी काली करतूतों का भंडा फोड़ कराऊंगा।
जब तक तुझको मिटा न लूँगा, चैन न कहीं मैं पाऊँगा।।
हमें फरेबो जाल सिखा कर, भाई भाई लड़वाया।
सकल वस्तु पर कब्जा करके हमको ठेंगा दिखलाया।।
चर्सा भर ले भूमि, भूमि भारत का चर्सा खिंचवाया।
बिन अपराध हमारे भाई को शूली पर चढ़वाया।।।
एक एक बलिवेदी पर अब लाखों शीश चढ़ाऊंगा।
जब तक तुझको मिटा न लूँगा, चैन न कहीं मैं पाऊँगा।।
बंग-भंग कर, नन्द कुमार को किसने फांसी चढ़वाई।
किसने मारा खुदी राम और झांसी की लक्ष्मीबाई।।
नाना जी की बेटी मैना किसने जिंदा जलवाई।
किसने मारा टिकेन्द्र जीत सिंह, पद्मनी, दुर्गाबाई।।
अरे अधर्मी इन पापों का बदला अभी चखाऊंगा।
जब तक तुझको मिटा न लूँगा, चैन न कहीं मैं पाऊँगा।।
किसने श्री रणजीत सिंह के बच्चों को कटवाया था।
शाह जफर के बेटों के सर काट उन्हें दिखलाया था।।
अजनाले के कुएं में किसने भोले भाई तुपाया था।
अच्छन खां और शम्भु शुक्ल के सर रेती रेतवाया था।।
इन करतूतों के बदले लंदन पर बम बरसाऊंगा।
जब तक तुझको मिटा न लूँगा, चैन न कहीं मैं पाऊँगा।।
पेड़ इलाहाबाद चौक में अभी गवाही देते हैं।
खूनी दरवाजे दिल्ली के घूंट लहू पी लेते हैं।।
नवाबों के ढहे दुर्ग, जो मन मसोस रो देते हैं।
गांव जलाये ये जितने लख आफताब रो लेते हैं।।
उबल पड़ा है खून आज एक दम शासन पलटाऊंगा।
जब तक तुझको मिटा न लूँगा, चैन न कहीं मैं पाऊँगा।।
अवध नवाबों के घर किसने रात में डाका डाला था।
वाजिद अली शाह के घर का किसने तोड़ा ताला था।।
लोने सिंह रुहिया नरेश को किसने देश निकाला था।
कुंवर सिंह बरबेनी माधव राना का घर घाला था।।
गाजी मौलाना के बदले तुझ पर गाज गिराऊंगा।
जब तक तुझको मिटा न लूँगा, चैन न कहीं मैं पाऊँगा।।
किसने बाजी राव पेशवा गायब कहां कराया था।
बिन अपराध किसानों पर कस के गोले बरसाया था।।
किला ढहाया चहलारी का राज पाल कटवाया था।
धुंध पंत तातिया हरी सिंह नलवा गर्द कराया था।।
इन नर सिंहों के बदले पर नर सिंह रूप प्रगटाऊंगा।
जब तक तुझको मिटा न लूँगा, चैन न कहीं मैं पाऊँगा।।
डाक्टरों से चिरंजन को जहर दिलाने वाला कौन ?
पंजाब केसरी के सर ऊपर लट्ठ चलाने वाला कौन ?
पितु के सम्मुख पुत्र रत्न की खाल खिंचाने वाला कौन ?
थूक थूक कर जमीं के ऊपर हमें चटाने वाला कौन ?
एक बूंद के बदले तेरा घट पर खून बहाऊंगा।
जब तक तुझको मिटा न लूँगा, चैन न कहीं मैं पाऊँगा।।
किसने हर दयाल, सावरकर अमरीका में घेरवाया है।
वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र से प्रिय भारत छोड़वाया है।।
रास बिहारी, मानवेन्द्र और महेन्द्र सिंह को बंधवाया है।
अंडमान टापू में बंदी देशभक्त सब भेजवाया है।।
अरे क्रूर ढोंगी के बच्चे तेरा वंश मिटाऊंगा।
जब तक तुझको मिटा न लूँगा, चैन न कहीं मैं पाऊँगा।।
अमृतसर जलियान बाग का घाव भभकता सीने पर।
देशभक्त बलिदानों का अनुराग धधकता सीने पर।।
गली नालियों का वह जिंदा रक्त उबलता सीने पर।
आंखों देखा जुल्म नक्श है क्रोध उछलता सीने पर।।
दस हजार के बदले तेरे तीन करोड़ बहाऊंगा।
जब तक तुझको मिटा न लूँगा, चैन न कहीं मैं पाऊँगा।।
जय माँ भारती !.............जय मातृभूमि की !!
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