Thursday, 27 December 2018

भारतीय नारी शक्ति

औरत को कोमल कहने वालो सुनलो मेरी बात।
आओ आज तुम्हे बतलाऊ औरत की औकात।।

यदि औरत कोमल होती तो, प्रसव की पीड़ा कैसे सहती।
अंतरिक्ष तक न वो पहुंचती, घूँघट में ही सिमटी रहती।।

इंदिरा सी बन कर न करती वो देश पे बरसो राज।
हाथों में तलवार थामकर अंग्रेजो से न वो लड़ती।।

निज सतीत्व की रक्षा हेतु, पद्मावती सा जोहर न करती।
पन्ना बन निज सूत का ही वो करती न बलिदान।।

यदि होती अबला नारी तो, नरमुंडों का हार न पहनती।
और कभी वो दुर्गा बन कर दुष्टों का संहार न करती।।

शब्दों में ही देखलो अंतर, नारी नर पर भारी है।
राधा- श्याम और सीता-राम में भी, औरत की पहली बारी है।।

नारी बिना न पूरी होती मर्दो की ये जाति।
यदि नारी न होती जग में सृष्टि बंजर रह जाती।।

सब कुछ सूना होता, हर देहरी मरघट कहलाती।
एक औरत ही पूरा करती सृष्टि और समाज।।

औरत को बस देह न समझो, वो तो एक चिंगारी है।
इज्जत दो तो जान लुटा दे , वर्ना सिंहनी बन दहाड़ी है।।

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Shree Ram Building Contractor

Manish Saini ......

Ajitgarh, (Sikar) Rajasthan
Mob. 09799063358
ms3799495@gmail.com




Wednesday, 31 October 2018

धर्म और विज्ञान

धर्म का विज्ञान से, भक्त का भगवान से।
क्या रिश्ता, हम जान लें, कुरान का गीता से।।

धर्म जीने की कला, मजहबों का सार है।
जीवित कैसे हम रहें, विज्ञान पर ये भार है।।

धर्म से ही मान है, विज्ञान से अभिमान है।

कुदरत से मिली ये दो आंखें, मानवता की शान हैं।।

धर्म दुःख की है दवा, विज्ञान मरहम दर्द का।
जिसने भी समझी ये हकीकत, समझो गुणों की खान है।।

धर्म सुख का जन्मदाता, विज्ञान मां आनंद की।
जिसने भी जानी ये पहेली, वही सुखी इंसान है।।

धर्म मन का है नियंता, विज्ञान तन का दास है।
धर्म निर्मल हास्य तो, दूजा निरा परिहास है।।

धर्म से जीवन खिला, विज्ञान से संसार ये।
धर्म से पावन धरा, विज्ञान से आकाश ये।।

धर्म मन की भूख तो, विज्ञान तन की प्यास है।
धर्म में आशा जगत की, विज्ञान तन की आस है।।

धर्म पढ़ाता, पाठ मर्म का, कर्म धुरी विज्ञान की।
धर्म भरता प्रेम जगत में, रक्षा करता ज्ञान की।।
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Jagdish Puri Mod, Shahpura Road, Ajitgarh (sikar) Rajasthan

Tuesday, 10 April 2018

कचरा खाने को मजबूर गौवंश...... हाल - ए - गौ माता

गौमाता की पीड़ा
कृष्ण दुलारी कितनी खुश थी, नन्दगांव बरसाने में ।
कचरा खाती आज घूमती वही गाय वीराने में ।।

घर में रखा, देखभाल की, जब तक गाय ने दूध दिया ।।
सड़कों और गलियोँ में छोड़ा बेरहमी से त्याग दिया ।।

कील, प्लास्टिक, शीशा खाकर, मरने को मजबूर किया ।
तड़प, तड़प कर प्राण दिये, गाय ने क्या कसूर किया ।।

लाखों गाय कट रहीं निरंतर, हर कत्लखाने में ,
कृष्ण दुलारी कितनी खुश थी, नन्दगांव बरसाने में ।
कचरा खाती आज घूमती वही गाय वीराने में ।।

प्लास्टिक और कचरा मिल कर, जहर बना देते हैं ।
लाखों कीड़े अन्दर से हर पेट में पीड़ा देते हैं ।।

कष्ट, यातना देदेके, बीमार बना देते हैं ।
खड़ी नहीं रह सकती, इतना कमज़ोर बना देते हैं ।।

पेट में बच्चा खाए गंदगी, शेष नहीं कुछ खाने में ,
कृष्ण दुलारी कितनी खुश थी, नन्दगांव बरसाने में ।
कचरा खाती आज घूमती वही गाय वीराने में ।।

आखरी सांसे लेती लेती दुर्घटना में मरती है ।
कभी कभी गाय के ऊपर से पूरी गाड़ी गुज़रती है ।।

लहु लुहान होकर के फिर गौमाता आहें भरती है ।
रोयें सारे देवी देवता बेबस रोती धरती है ।।

कैसे कैसे जुल्म सहे हैं ऐसे बेदर्द ज़माने में ,
कृष्ण दुलारी कितनी खुश थी, नन्दगांव बरसाने में ।
कचरा खाती आज घूमती वही गाय वीराने में ।।

नन्दबाबा गौभक्त थे, लाखों गाय रखते थे ।
रघु असंख्य गायों का, पालन पोषण करते थे ।।

सारे हमारे ऋषि मुनि, गौ की सेवा करते थे ।
दूध की नदियां बहती थीं, सोने के खज़ाने भरते थे ।।

राम, कृषण दोनों जन्मे, गाय के घराने में ,
कृष्ण दुलारी कितनी खुश थी, नन्दगांव बरसाने में ।
कचरा खाती आज घूमती वही गाय वीराने में ।।

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Shree Ram Building Contractor
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